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श्री खाटूश्याम जी भजन


(तर्ज: मिलो न तुम तो हम घबराये....)

इक दिन कान्हा शोर मचाये, पेट पकड़ चिल्लाये,

अरे क्या हो गया है-2

भामा रूक्मण समझ न पाये, कैसे रोग मिटाये,

अरे क्या हो गया है-2।।

‘‘अन्तरा’’

पूछे है दोनों रानी, पीड़ा मिटेगी कैसे साँवरे,

नैनों में भरके पानी, बोले बचूं ना मैं तो आज रे

चरणों को धोकर जल लाओ, लाकर मुझे पिलाओ

अरे क्या................................................।।1।।

 

ऐसा ना होगा हमसे, कहने लगी वो दोनों रानी ये,

पैरों को धोकर अपने, कैसे पिला दे भला पानी ये

जब तक सूरज चाँद पलक पे, होगा वास नरक में

अरे क्या................................................।।2।।

 

नारद से बोले कान्हा, अब तो हुआ है बुरा हाल रे,

राधा से जाके कह दो, अपने कन्हैया को संभाल रे

आज अगर वो जल ना पाऊँ, मुश्किल है बच पाऊँ

अरे क्या................................................।।3।।

 

सोचे वो प्रेम दिवानी, प्रेम का यही दस्तूर है,

प्राण बचे मोहन के, नर्क में जाना मँजूर है

झट से अपने चरण धुलाये, लोटा दिया थमाय

अरे क्या................................................।।4।।

 

धन्य ओ राधे रानी, रीत निभाई तून प्रीत की,

प्रीत में लुटकर मानो, खुशियाँ मिली हो तुझे जीत की

‘हर्ष’कहे कान्हा मुस्काये, रानी खड़ी लजाए

अरे क्या................................................।।5।।

।। इतिश्री।।

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