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श्री खाटूश्याम जी भजन


कान्हा सारी दुनियाँ बताव थानै चोर
चोरी करबो छोड़ो जी, म्हांसू रिश्तो जोड़ा जी
कन्हैया चितचोर

।। अन्तरा।।
कान्हा थानै चोरी की कैया पड़गी बाण
म्हानै यो समझाओ जी, को भरम मिटाओ जी 
कन्हैया चितचोर.......................................।।1।।

कान्हा थे ही श्रृष्टि का सरजन हार 
थारै कांइ घाटो जी, मन मं चुभ रह्यो कांटो जी
कन्हैया चितचोर.......................................।।2।।

कान्हा था पर तन-मन-धन द्यूं वार
नैण सूँ नैण मिलाओ जी, थोड़ा सा मुस्काओ जी
कन्हैया चितचोर.......................................।।3।।

कानूड़ा प्यारा माखन की कांई औकात
‘नन्दू’ समझ न पावै जी, गोपी नाच नचावै जी
कन्हैया चितचोर.......................................।।4।।

।। इतिश्री।।

 

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