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surajgarh nishan yatra 2024

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सूरजगढ़ निशान यात्रा 2024 - खाटूधाम फाल्गुन मेला 2024


।। सूरजगढ़ खाटूश्याम निशान यात्रा आवश्यक सूचना 2024 ।।


376 वीं सूरजगढ़ निशान यात्रा में आप सभी भक्तों का हार्दिक स्वागत है।


आप सभी श्याम भक्तों को सूचित किया जाता है कि इस बार 376 वीं सूरजगढ़ निशान स्थापना सोमवार 11 मार्च 2024 को होगी ।


प्रथम निशान महा आरती सोमवार 11 मार्च 2024, द्वितीया महा आरती मंगलवार 12 मार्च 2024, तृतीया महा आरती बुधवार 13 मार्च 2024 एवम चतुर्थ महा आरती गुरूवार को होगी ।


पदयात्रा शुक्रवार 15 मार्च 2024 से प्रारंभ होगी । ये पदयात्रा सूरजगढ़ से सुलताना, गुढ़ा, उदयपुरवाटी, गुरारा, मंढा होते हुए खाटूश्याम जी पहुंचेगी। द्वादशी के दिन गुरूवार 21 मार्च 2024 यह निशान बाबा श्याम को चढ़ाया जायेगा।


अतः आप सभी श्याम भक्तों से अनुरोध है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में आकर बाबाश्याम का आशीर्वाद ग्रहण करें।

Surajgarh Nishan Yatra 376th schedule-2024

।। आप सभी को जय श्री श्याम।।


मेले के दौरान बाबा श्याम को लाखों निशान चढ़ाए जाएंगे, मगर सूरजगढ़ का निशान सबसे खास है। इससे जुड़ा इतिहास भी बेहद रोचक है। यही वो निशान है, जो मेले के दौरान चढ़ाए जाने के बाद सालभर बाबाश्याम के मुख्य शिखरबंद पर लहराता है। झुंझुनूं जिले के सूरजगढ़ से श्याम भक्त हर साल बड़े उत्साह से गाजे-बाजे के साथ अपनी ही धुन में नाचते-गाते खाटू पहुंचकर यह निशान लख दातार को अर्पित करते हैं। इसे सूरजगढ़ वालों के निशान के नाम से जाता है। खास बात यह है कि सूरजगढ़ वालों के इस जत्थे में कस्बे व आस-पास के हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। ये श्रद्धालु पैदल ही खाटूधाम पहुंचते हैं। निशान चढ़ाने के बाद पैदल ही घर लौटते हैं। यह परम्परा कई सालों से जारी है।


ज्यादातार श्रद्धालु पगड़ी बांधे होते हैं। इसके अलावा सिर पर सिगड़ी भी रखे होते हैं, जिसमें ज्योत जलती रहती है। कहते हैं कि रास्ते में भले ही आंधी-तुफान या बारिश आए, मगर सिगड़ी में बाबा की ज्योत निरंतर जलती रहती है। निशान पदयात्रा के साथ कलाकार भजन व धमाल गाते हुए खाटूधाम पहुंचते हैं। पदयात्रा का कस्बे में जगह-जगह फूल बरसा कर स्वागत किया जाता है। ये पदयात्रा सूरजगढ़ से सुलताना, गुढ़ा, उदयपुरवाटी, गुरारा, मंढा होते हुए खाटूश्यामजी पहुंचती है। द्वादशी के दिन यह निशान बाबा श्याम को चढ़ाया जाता है।


बाबा श्याम फाल्गुन मेले में वैसे तो लाखो भक्त, लाखो निशान चढाते है पर एक निशान ऐसा होता है जो सबसे खास है, हो भी क्यों ना, खुद बाबा श्याम की मर्जी पर यह निशान हर साल उनके शिखर पर साल भर लहराता है


खाटूश्यामजी मंदिर के शिखर पर सूरजगढ़ का निशान ही क्यों चढ़ता है ?


सूरजगढ़ निशान को शिखर बंद पर चढ़ाये जाने के पीछे एक अमर गाथा जुड़ी है। आज से कुछ वर्षों पहले फाल्गुन शुक्ला द्वादशी को खाटू धाम में कई स्थानों से आये भक्तों में सबसे पहले शिखर बंद पर निशान चढ़ाने की होड़ मच गई थी।


जबकि सूरजगढ़ का निशान पुराने समय से चढ़ता आ रहा था। लेकिन उसके बावजूद दूर-दूर से आये सभी भक्तगण अपनी-अपनी जिद्द पर अड़े रहे। बाद में सर्व सम्मति से यह निर्णय लिया गया कि जो भी भक्त श्याम मन्दिर खाटू धाम में लगे ताले को बिना चाबी के खोलेगा वही निशान सबसे पहले चढ़ायेगा। सभी दूर-दूर से आये भक्तों को मौका दिया गया लेकिन कोई मोरछड़ी से ताला नहीं खोल पाया। बाद में भक्त शिरोमणि श्री गोवर्धन दास जी ने अपने शिष्य मंगलाराम को मोर पंखी से ताला खोलने का आदेश दिया। भक्त मंगलाराम जी ने अपने गुरू गोवर्धन दास जी का आदेश पाकर बाबाश्याम से प्रार्थना करके तथा उनसे आशीर्वाद लेकर झट से ताला बिना चाबी के खोल दिया।


उसी चमत्कार के कारण सूरजगढ़ निशान फाल्गुन मास की प्रत्येक द्वादशी को दोपहर में शिखर बंद के ऊपर चढ़ाया जाता है।


सूरजगढ़ निशान दर्शन और यात्रा करने के लिये सम्पर्क सूत्र कपिल इन्दौरिया 8561018438, मनीष इन्दोरिया 9351544477


।। बोलो बाबा श्याम की जय।।