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Baba khatu shyam blog
Jab koi bhakt apne…..?

Jab koi bhakt apne…..?

भगवान् सर्वशक्तिमान होकर भी अपने भक्तों के आधीन रहते हैं। जब कोई भक्त अपने आराध्य को सच्चे मन से समर्पित होकर पुकारता है तो आराध्य स्थिर नहीं रह सकते वे तुरन्त चल पड़ते हैं। भक्त के लिये आवश्यक है कि वो ईश्वर से बिछुड़ने का दर्द महसूस करें। उनके आगे रूदन करें। क्योंकि प्रभु अत्यन्त […]

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Jeev wo hai jiska…?

Jeev wo hai jiska…?

जीव वो है जिसका मन स्त्री और धन में फंस के रह जाता है। जिसका मन इन दोनों में आसक्त नहीं हे, सम लेना वो साधारण मनुष्य नहीं है। श्री रामकृष्ण परमहंस साधक को इन्हीं दोनों से सावधान किया करते थे। ***************************************************************************************************** यमराज ने अपने दूतों को कहा कि तीन प्रकार के लोगों को मेरे […]

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Manushya mrityu ke bhay se……..?

Manushya mrityu ke bhay se……..?

मनुष्य मृत्यु के भय से ही धर्म करता है। संसार छोड़ने के समय दुःख और विलाप इसीलिये होता है, क्योंकि हमने उन सभी लोगों को, वस्तुओं को, सम्पत्ति को, अपना समझ लिया है। जबकि वास्तव में हमारा कुछ भी नहीं है, केवल हमारा कर्म ही हमारा है। इस सत्य को नहीं समझना ही हमारी सबसे […]

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Yah sari srasti….?

Yah sari srasti….?

यह सारी सृष्टि, ब्रह्मांड, ईश्वर की समस्त रचना इसका सारा रहस्य परम ज्ञानी और विज्ञानी भी आज तक नहीं जान पाये, फिर एक साधारण मनुष्य की तो बात ही क्या है। सृष्टि में जीव सौ करोड़ रूपों में प्रकट होते हैं। ईश्वर की माया में कुछ भी असंभव नहीं है। मनुष्य का अपना शरीर ही […]

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Manushya ke paas sabse badi…?

Manushya ke paas sabse badi…?

अपने प्रत्येक कर्म की अच्छाई और बुराई हर क्षण, हर पल, परखते रहना चाहिये। इस परखने की मनुष्य के पास केवल एक ही कसौटी है और वो ये कि वह सोचे कि यदि मैं इसी क्षण मर जाऊं तो तेरे इस कर्म की गिनती अच्छी में होगी या बुरे में। ***************************************************************************************************** मनुष्य के पास सबसे […]

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Prabhu ka naam paap ko ….?

Prabhu ka naam paap ko ….?

प्रभु का नाम पाप को जलाता है। इस आत्मा ने जन्म जन्मांतरों में, अनेक रूप धारण करके, जाने अनजाने, न मालूम कितने पाप किये हैं। अब मनुष्य जन्म में सबसे उत्तम शरीर मिला है, और प्रभु ने असीम कृपा करके मुक्त होने का यह सुनहरा अवसर प्रदान किया है तथा उसके लिये ईश्वर का नाम […]

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Jisne mitrata ka marm nahi ……….?

Jisne mitrata ka marm nahi ……….?

प्रातःकाल उठकर सबसे पहले माता-पिता व गुरूदेव की चरण वन्दना करने से बालक में विद्या, गुण, यश और बल की वृद्धि होती है, ये बात निश्चित है। तुलसीदास जी ने बालकांड में लिखा है कि ‘प्रातःकाल उठके रघुनाथ, मात, पिता, गुरू नावहिं माथा’। ***************************************************************************************** यदि भूल हो जाये तो उसे तुरन्त सुधारने का प्रयत्न करना […]

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Sansar Jisko meetha lagta hai….?

Sansar Jisko meetha lagta hai….?

संसार जिसको मीठा लगता है वो समझ लो सो रहा है, और जिसे कड़वा लगने लगा वो जगा रहा है। तभी तो संत कहता है इस असत्य संसार को एक स्वप्न के समान जानो और इसे चर्म चक्षुओं से नहीं बल्कि ज्ञान चक्षुओं से देखो। ***************************************************************************************************** सुख और दुःख तो शरीर और मन के धर्म […]

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Apna hit to sabhi chahte hai…?

Apna hit to sabhi chahte hai…?

अपना हित तो सभी चाहते हैं, पर जो अपने साथ दूसरों के लिये भी सोचते हैं, ऐसे सज्जन की मित्रता भाग्यवानों को ही प्राप्त होती है। ***************************************************************************************************** वासना ईश्वर की उपासना नहीं करने देती। ये साधक के कार्य में बाधक है। इसलिये इस वासना को अनुशासन में रखना अत्यंत आवश्यक है। और यदि इसे मन […]

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Manushya to swabhav se hi….?

Manushya to swabhav se hi….?

मनुष्य तो स्वाभाव से ही भावुक है, परन्तु यदि भावना पर से ज्ञान का अंकुश हटा लिया जाये, तो भूल हो जाती है, और फिर पछताना पड़ता है। किन्तु यदि कभी ऐसी भूल हो ही जाये, तो उसका उपचार है सच्चे मन से पश्चाताप। ऐसा करने से वो भूल स्वयं ही समाप्त हो जाती है। […]

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