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Baba khatu shyam blog
Manushya ke andar 5 prakar ke…?

Manushya ke andar 5 prakar ke…?

मनुष्य के भीतर पांच प्रकार के कोष हैं, जिनका क्रम इस प्रकार है – 1. शरीरमय कोष-ये है हमारा पंच भूतों से बना हाड़-मांस का शरीर जो जड़ है। 2. मनमय कोष-ये ही मनुष्य की सारी क्रियाओं को, समस्त चेष्टाओं को आरंभ करने वाला है। 3. बुद्धिमय कोष-ये है हमारी सोच कर निर्णय लेने की […]

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Sansar me samay se poorv…..?

Sansar me samay se poorv…..?

संसार में समय से पूर्व कभी कुछ नहीं घटित होता और कौन सी घटना कब आ जाये, ये रहस्य मनुष्य कभी नहीं जान पाता। इसका ज्ञान तो उस परमेश्वर को ही रहता है। इसलिये उस प्रभु के न्याय पर विश्वास करके, हमें हर समय अपना उचित कर्तव्य करते रहना चाहिये, ये सदैव याद रखते हुये […]

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sampurna samarpan me jadoo hai……?

sampurna samarpan me jadoo hai……?

संपूर्ण समर्पण में जो जादू है। प्रभु की ऐसी कृपा होती है समर्पण के बाद, कि वासना भी उन्हें देने से उपासना बन जाती है। ***************************************************************************************************** हमारे जीवन में जब श्रद्धा और विश्वास का विवाह हो जाता है, तो राम का जन्म होता है, अर्थात् श्रीराम हमारे जीवन में प्रकट हो जाते हैं। ***************************************************************************************************** प्यार […]

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striyan pariwar ki lakshmi hoti hai…..?

striyan pariwar ki lakshmi hoti hai…..?

स्त्रियां परिवार की लक्ष्मी होती हैं, इसलिये परिवार के धन का उपयोग यानि पारिवारिक व्यय उनके ही हाथों में देना चाहिये। कुशल गृहणियां जानती हैं कि उन्हें उस धन का सदुपयोग कैसे करना है। यह स्त्रियों की जन्मजात प्रकृति होती है। गृहस्थ धर्म में परिवार के संचालन का अधिकार स्त्रियों को ही दिया गया है। […]

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mata pita ka sadaiv aadar karna chahiye……?

mata pita ka sadaiv aadar karna chahiye……?

जो अपने माता-पिता का ही नहीं, वह किसका होगा ? जिसके कष्टों और अश्रुओं की शक्ति से अस्तित्व प्राप्त किया, उसी के प्रति अश्रद्धा रखने वाला पत्नी, पुत्र, भाई और समाज के बारे में क्या श्रद्धा रखेगा। ऐसे पाखंड़ी से दूर रहना ही श्रेयस्कर है। ***************************************************************************************************** प्रेम और भक्ति ही ईश्वर की सबसे बड़ी शक्ति […]

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mata pita ke prati sadaiv shriddha rakhni chahiye….?

mata pita ke prati sadaiv shriddha rakhni chahiye….?

माता-पिता के प्रति अश्रद्धा रखकर अपमानित करने वाले और उनके प्रति निंदा का भाव रखकर उन्हें दुःखी करने वाले व्यक्ति का वंश नाश हो जाता है। उन्हें पितरों का आशीर्वाद नहीं मिलता। ***************************************************************************************************** माता-पिता एवं गुरू का त्याग करने वाला, उनकी निंदा करने वाला, उन्हें प्रताड़ित करने वाला मनुष्य समस्त वेदों का ज्ञाता, यज्ञादि को […]

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jis stree me apni santan ke prati prem nahi h usme karuna ka abhav……?

jis stree me apni santan ke prati prem nahi h usme karuna ka abhav……?

जिस स्त्री में अपनी संतान के प्रति ममता नहीं, जिसमें करूणा और संवेदना का अभाव है, जो अपनी संतान के प्रति लापरवाह है और अपने सुख को प्राप्त करने के लिये ही प्रयत्नशील रहती है, उसका त्याग कर देना चाहिये। ***************************************************************************************************** जो अज्ञानी बालकों को हतोत्साहित करते हैं, उनकी लक्ष्मी, कीर्ति, यश, तेज आदि का […]

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apni santan ko gunwan banana mata pita guru ka……..?

apni santan ko gunwan banana mata pita guru ka……..?

अपनी संतान में संस्कार, शील, प्रकृति एवं सद्गुणों का विकास करना माता, पिता एवं गुरू का कर्तव्य होता है। इनमें भी माता का दायित्व सबसे बड़ा है, क्योंकि उसके विचारों, संस्कारों एवं आहार-विहार का प्रभाव गर्भकाल से ही शिशु पर पड़ने लगता है और उस प्रभाव को दूर करना कष्ट साध्य होता है। ***************************************************************************************************** अपनी […]

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insan ka koi kam aisa na ho jisse atma aur permatma do…..?

insan ka koi kam aisa na ho jisse atma aur permatma do…..?

तुम्हारा कोई काम ऐसा नहीं होना चाहिये, जिससे तुम्हें अपनी आत्मा और परमात्मा के सामने लज्जिल होना पड़े। ***************************************************************************************************** इस संसार की अंधियारी में किसी को अपना ज्योति-स्तंभ बनाओ। पढ़ा-पढ़ाया कुछ अंश तक पथ-प्रदर्शक होता है, पर सच्चे पथ-प्रदर्शक वे संत महापुरूष ही होते हैं, जो संसार में अपना काम और नाम छोड़ जाते हैं। […]

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prem aatma ka bhushan h……?

prem aatma ka bhushan h……?

बाह्य सौन्दर्य किस काम का जब प्रेम-जो आत्मा का भूषण है, हृदय में न हो। ***************************************************************************************************** जिस ब्रह्मांड में सूर्य भी नदी तट के बाल के एक कण के समान है, उसी ब्रह्मांड में रहकर यदि मनुष्य गर्व करे तो उससे बड़ा मूर्ख कौन होगा। ***************************************************************************************************** हम महानता के निकटतम होते हैं, जब हम नम्रता […]

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