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Baba khatu shyam blog
Charitra ka nirman to ..?

Charitra ka nirman to ..?

कोई भी व्यक्ति स्वप्न देख-देखकर चरित्रवान नहीं बन सकता । चरित्र का निर्माण तो अपने आपको गढ़-गढ़कर, ढाल-ढालकर करना होता है। कर्तव्य के प्रति निष्ठा, संयम और सदाचार के प्रति श्रद्धा, सत्य के प्रति अनुराग, ज्ञान के प्रति एक जिज्ञासा और मानवता के उत्कर्ष के प्रति एक दृढ़ आस्था ही महान् चरित्र के निर्माण के […]

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Jo log kul aachar…?

Jo log kul aachar…?

जो लोग कुल आचार-व्यवहार हीन है, उसके पास भले ही गौ, घोड़े, भेड़-बकरी आदि पशु, खेती की जमीन और चाहे जितना ऐश्वर्य हो, फिरी भी उनकी उत्तम कुलों में गिनती नहीं होती। ***************************************************************************************************** जिन लोगों के पास लाखों रूपये हैं, वे भी जीते हैं और जिनके पास केवल सैकड़ों रूपये हैं, वे भी जीते हैं, […]

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Prithvi par anna, jal…..?

Prithvi par anna, jal…..?

गौ, ब्राह्मण की रक्षा के लिये तथा स्त्री और धन को अपहत होते हुये देखकर उनकी रक्षा के लिये जो व्यक्ति युद्ध करते हुये अपने प्राणों का परित्याग करता है, उसको सनातन लोक में सम्मान मिलता है। ***************************************************************************************************** पृथ्वी पर अन्न, जल तथा सुन्दर शब्द, ये ही तीन रत्न है। मूर्खों ने पत्थर के टुकड़ों […]

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Jo chahte hai wo hota nahi…?

Jo chahte hai wo hota nahi…?

जो चाहते हैं वो होता नहीं। जो होता है वो भाता नहीं और जो भाता है वो टिकता नहीं। यही इस संसार का सत्य है। इसलिये संत कहते है दुःख और विफलता को भी अपने जीवन में साधन बनाइये, उसका उपयोग कीजिये, और आगे बढ़ जाइये। ***************************************************************************************************** धन गया तो कुछ गया, स्वास्थ्य गया तो […]

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Sansar ke sabhi prani..?

Sansar ke sabhi prani..?

संसार के सभी प्राणी चर-अचर भेद से दो प्रकार के हैं, थलचर, जलचर और नभचर भेद से तीन के प्रकार तथा जरायुज, अंडज, उद्भिज और स्वेदज भेद से चार प्रकार के होते हैं। सभी प्राणियों के अपने-अपने शुभ-अशुा कर्मों के फलस्वरूप ही, देवादि योनियों में जीव जन्म ग्रहण करता है। ये सभी योनियां शुभ-अशुभ तथा […]

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Gyan, Vairag aur Bhakti ye 3 marg …?

Gyan, Vairag aur Bhakti ye 3 marg …?

ज्ञान, वैराग्य और भक्ति ये तीन मार्ग हैं। ज्ञान का मार्ग बड़ा कठिन है। ज्ञान से ही वैराग्य उत्पन्न होता है, और इन दोनों का ही प्रिय और सरल स्वरूप है भक्ति। ***************************************************************************************************** हमारे शास्त्रों में लिखा है कि यदि पति कोई भी धर्म का कार्य करता है तो उसका आधा फल अपने आप ही […]

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Katha sunne ke bad..?

Katha sunne ke bad..?

काम, क्रोध, मद और लोभ ये चार तो मनुष्य के प्रबल शत्रु हैं ही, परन्तु एक पांचवां शत्रु भी बड़ा भयानक है, और वो है हमारी भेद-बुद्धि, यानि सबको बराबर न समझते हुये, द्वेष-पूर्ण व्यवहार करना। खाने में समय नहीं लगता, पचाने में लगता है। इसी प्रकार पढ़ने या सुनने में कम समय लगता है […]

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maan ka swabhav hai….?

maan ka swabhav hai….?

दूसरा तत्व है ब्रह्म अथवा परमात्मा का। उस ईश्वर का, उस प्रकाश का ज्ञान होना जो सदा हमारे भीतर में विराजमान है। इसको भीतर में देखने से, पहचान लेने से, हमारी आत्मा को एक अद्भुत सुख शांति का अनुभव होगा। हम अपनी दृष्टि को अंदर की ओर मोड़े चाहे योग से, चाहे चिंतन से, चाहे […]

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Hamari vaidik sanskrit me do hi cheejen…?

Hamari vaidik sanskrit me do hi cheejen…?

हमारी वैदिक संस्कृति में दो ही चीजें मुख्य हैं : – ब्रह्म और धर्म। धर्म के बिना हम अपना जीवन सुखमय नहीं बना सकते है। यह एक ऐसा सत्य है जैसे प्रतिदिन पूर्व दिशा से सूर्य का निकलना। हमारा जितना भी बाहरी जीवन है, हमारा पारिवारिक जीवन, संसार में व्यवहारिक जीवन, तथा हमारा शारीरिक स्वस्थ […]

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Mitrata ek durlabh bhavna hai

Mitrata ek durlabh bhavna hai

मित्रता एक दुर्लभ भावना है, किन्तु किसी को अच्छी प्रकार परखने के पश्चात् ही मित्र बनाना चाहिये। दुष्ट एवं पाखंड़ी व्यक्तियों से अपने लाभ के लिये भी मित्रता नहीं करनी चाहिये, न ही इन पर विश्वास करना चाहिये। जो मूर्खों या दुष्टों की संगति नहीं करता या उससे परामर्श नहीं लेता, वह सदा संकट से […]

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