Dalip Kumar Exambook 01141011015
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श्री खाटूश्याम जी भजन


कान्हा सारी दुनियाँ बताव थानै चोर
चोरी करबो छोड़ो जी, म्हांसू रिश्तो जोड़ा जी
कन्हैया चितचोर

।। अन्तरा।।
कान्हा थानै चोरी की कैया पड़गी बाण
म्हानै यो समझाओ जी, को भरम मिटाओ जी 
कन्हैया चितचोर.......................................।।1।।

कान्हा थे ही श्रृष्टि का सरजन


नन्द रानी कन्हैया, जबर भयो रे
मेरी मटकी उलट के, पलट गयो रे

।। अन्तरा।।

मुस्कान इसकी, लगे प्यारी प्यारी

दीवानी हुई इसकी, सारी ब्रजनारी

ऐकी बंशी में जियरो, अटक गयो रे।।

मेरी मट


(धमाल)

नखरो छोड़ दे साँवरिया, थोड़ो सीधो हो जा रे नखरो छोड़ दे

सीधो हो जा रहे साँवरा सीधो हो जा रे, नखरो छोड़ दे

।। अन्तरा।।

सतयुग


तर्ज : रसिया

सुन बरसाने वाली, गुलाम तेरो बनवारी

।। अन्तरा।।

तेरी पायलिया पे, ‘बाजे मुरलिया’-2

छम-छम नाचे गिरधारी-गुलाम तेरो बनवारी,


(तर्ज: मिलो न तुम तो हम घबराये....)

इक दिन कान्हा शोर मचाये, पेट पकड़ चिल्लाये,

अरे क्या हो गया है-2

भामा रूक्मण समझ न पाये, कैसे रोग मिटाये,

अरे क्या हो ग


मीठे रस से भरयोरी राधा रानी लागै
म्हानै कारो कारो जमुना जी रो पाणी लागै

।। अन्तरा।।

जमुना मैया कारी कारी, राधा गोरी-गोरी

वृन्दावन में धूम मचावै, बरसाणै री छोरी

ब्रजधाम राधाजी की ‘रजधानी लागै’-2


राधा ढूँढ रही, किसी ने मेरा श्याम देखा

।। अन्तरा।।

राधा तेरा श्याम मैंने, ‘नन्द गाँव में देखा’-2

माखन चुराते हुए, राधा तेरा श्याम देखा

राधा ढूँढ रही...............................।।1।।


साँवरिया ले चल परली पार, कन्हैया ले चल परली पार
जहाँ बिराजे राधा रानी अलबेली सरकार।

। अन्तरा ।

गुण अवगुण सब तेरे अर्पण

बुद्धि सहित मन तेरे अर्पण

ये जीवन भी तेरी अर्पण

पाप पुण्य सब तेरे अर्पण

तर्ज : गाड़ी वाले गाड़ी धीरे

राधे मेरी बंसी कहाँ खो गई, कोई ना बतावै शाम हो गई

राधे मेरी बंसी.....................

।। अन्तरा।।

बिन बंसी कैसे घर जाऊँ, ‘बंसी प्राण प


मनिहारी का भेष बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया।
छलिया का भेष बनाया, श्याम चूड़ी बेचने आया।I

।। अन्तरा ।।

झोली कंधे धरी, उसमें चूड़ी भरी

गलियों में शोर मचाया, श्याम चूड़ी बेचने आया

मनिहारी का भेष......................................।।1।।


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