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भक्ति संग्रह


।। काल भैरव अष्टमी ।।

शिव पुराण की रूद्र संहिता के अनुसार सदा शिव ने मार्गशीर्ष (अगहन) मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भैरव रूप में अवतार लिया। अतः उन्हें साक्षात् भगवान शंकर ही मानना चाहिए।

।। बैकुण्ठ चतुर्दशी ।।

कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी कहते हैं, इसमें यमराज का पूजन होता है और कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को बैकुण्ठ चतुर्दशी कहते हैं। बैकुण्ठ चतुर्दशी को प्रणवेश (

।। भीष्मपंचक व्रत ।।

कार्तिक मास में एक मास का व्रत व स्नान न कर सके तो वह कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक सूर्योदय से पूर्व स्नान एवं व्रत करने से कार्तिक मास का पूर्ण फल प्राप्त करता है। पुष्कर त

।। तुलसी विवाह ।।

एक मत से - कार्तिक शुक्ला नवमी से एकादशी तक तुलसी विवाह मनाते हैं। एक मत से कार्तिक शुक्ला एकादशी से पूर्णिमा तक तुलसी जी का विवाह मनाते हैं।

सर्वमान्य देवोत्थापिन

।। देव प्रबोधनी एकादशी ।। (देव उठनी एकादशी)

कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान नारायण शयन से उठते हैं। इस दिन भगवान को सायंकाल के समय शंख घंटा घड़ियाल के द्वारा जगाना चाहिए।

प्रार्थना करनी चाहिए

।। अक्षय नवमी ।।

ब्रह्माजी ने उत्कृष्ट तप किया। भगवान ने प्रसन्न होकर दर्शन दिये दर्शनानन्द से प्रेमाश्रु टपके, इसी से आंवले की उत्पत्ति हुई। पुराणों में निर्देश दिया है, यह परम पवित्र आमलकी फल उ

।। आँवला नवमी ।।

इसी नवमी को आँवला के वृक्ष के जड़ के पास बैठकर ‘‘धात्र्यै नमः”  कहकर आह्वान करें। जल से पाद्य से अर्ध्य से आचमन आदि के निमित्त वृक्ष के मूल में जल चढ़ायें। फिर दूध की धारा दें।

अक्षय नवमी - आँवला नवमी (कूष्माण्डा नवमी)

कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी को कूष्माण्ड नवमी कहते हैं। इस दिन भगवान् विष्णु ने कूष्माण्ड नाम के राक्षस का वध किया था। इस दिन कूष्माण्ड (कुम्हड़ा) में सोना पंचरत्न या द्रव्य रखकर उस

गोपाष्टमी कथा तथा गोपालक श्रीकृष्ण

gopashtami
एक दिन कन्हैया बाबा नन्द एवं मैया यशोदा के सामने मचल गये। अब मैं बड़ा हो गया, गैया चराऊँगा। माँ ने समझाया-लाला बड़ी-बड़ी सीं

।। गोपाष्टमी ।।

कार्तिक शुक्ला अष्टमी को यह दिव्य पर्व मनाया जाता है। गौमाता के शरीर में सब देवता तथा गोबर में लक्ष्मी और गौमूत्र में गंगा जी का निवास है। अतः गौ पूजन से हमारा जीवन परम पवित्र होता

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